भोर की आवाज़, नई दिल्ली, 29 जनवरी 2026 – देश के बुलियन बाजार में बृहस्पतिवार को जबरदस्त तेजी देखने को मिली। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सोना 1.67 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के ऐतिहासिक स्तर को छू गया, जबकि चांदी की कीमत 3.80 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के करीब पहुंच गई। यह उछाल अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों में भारी वृद्धि और घरेलू स्तर पर मजबूत मांग के चलते आया है।
घरेलू बाजार में रिकॉर्ड तेजी
MCX पर सोने की फरवरी डिलीवरी वाला कॉन्ट्रैक्ट आज 1,67,000 रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गया,

जो महज दो दिन पहले के 1.62 लाख रुपये के स्तर से लगभग 5,000 रुपये की बढ़ोतरी है। इस तेजी ने निवेशकों और ज्वैलर्स दोनों को चौंका दिया है।
चांदी के मामले में भी स्थिति इससे अलग नहीं रही। MCX पर चांदी ने 3,80,000
रुपये प्रति किलोग्राम का स्तर छुआ, जो प्रति ग्राम लगभग 380 रुपये के बराबर है। पिछले कुछ हफ्तों में चांदी ने सोने से भी तेज रैली का प्रदर्शन किया है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार की स्थिति
वैश्विक स्तर पर भी कीमती धातुओं में जबरदस्त उछाल देखा गया। स्पॉट गोल्ड बृहस्पतिवार को 5,507.95 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गया, जो पिछले दिन से 1.63% की बढ़ोतरी दर्शाता है। पिछले एक महीने में सोने की कीमत में 26.96% की वृद्धि हुई है, जबकि साल-दर-साल आधार पर यह 96.98% चढ़ा है।
चांदी ने और भी शानदार प्रदर्शन किया। अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी 118.57 डॉलर प्रति औंस के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई, जो एक दिन में 1.71% की बढ़ोतरी है। पिछले महीने में चांदी में 55.60% की तेजी आई है, और वार्षिक आधार पर यह 274.89% चढ़ी है – जो एक असाधारण रिटर्न है।
प्रमुख शहरों में सोने-चांदी की कीमतें
देश के प्रमुख शहरों में आज सोने और चांदी की कीमतें इस प्रकार रहीं:
दिल्ली:
- 24 कैरेट सोना: 16,210 रुपये प्रति ग्राम

- 22 कैरेट सोना: 14,860 रुपये प्रति ग्राम
- 18 कैरेट सोना: 12,161 रुपये प्रति ग्राम
- चांदी: 380 रुपये प्रति ग्राम
मुंबई:
- 24 कैरेट सोना: 16,195 रुपये प्रति ग्राम
- 22 कैरेट सोना: 14,845 रुपये प्रति ग्राम
- चांदी: 375 रुपये प्रति ग्राम
चेन्नई और कोलकाता:
- 24 कैरेट सोना: 16,200 रुपये प्रति ग्राम
- 22 कैरेट सोना: 14,850 रुपये प्रति ग्राम
- चांदी: 378 रुपये प्रति ग्राम
कीमतों में तेजी के मुख्य कारण
1. अमेरिकी डॉलर में कमजोरी
अमेरिकी डॉलर चार साल के निचले स्तर पर पहुंच गया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में डॉलर की गिरावट को हल्के में लिया है, जिससे निवेशकों में अनिश्चितता बढ़ी है। कमजोर डॉलर सोने को अन्य मुद्राओं में सस्ता बनाता है, जिससे मांग बढ़ती है।
2. भू-राजनीतिक तनाव
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और अमेरिका-ईरान के बीच टकराव की आशंका ने सुरक्षित निवेश की मांग को बढ़ावा दिया है। अमेरिका ने ईरान के खिलाफ संभावित सैन्य कार्रवाई की चेतावनी दी है, जिससे वैश्विक बाजारों में अस्थिरता बढ़ी है।
3. फेडरल रिजर्व की नीति
अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने ब्याज दरों को 3.50%-3.75% पर बरकरार रखा है, लेकिन महंगाई को लेकर चिंताएं जताई हैं। बाजार में उम्मीदें हैं कि साल के अंत तक दरों में कटौती की जा सकती है, जो सोने के लिए सकारात्मक संकेत है।
4. केंद्रीय बैंकों द्वारा खरीद
दुनिया भर के केंद्रीय बैंक अपने भंडार में विविधता लाने के लिए सोने की खरीद कर रहे हैं। यह निरंतर संस्थागत मांग कीमतों को ऊपर की ओर धकेल रही है।
5. औद्योगिक मांग (चांदी के लिए)
नवीकरणीय ऊर्जा, विशेष रूप से सौर ऊर्जा क्षेत्र, और इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग से मजबूत औद्योगिक मांग के कारण चांदी की आपूर्ति तंग हो रही है। सोलर पैनल निर्माण में चांदी का उपयोग लगातार बढ़ रहा है।
6. भारतीय रुपये में कमजोरी
डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया भी कमजोर हुआ है, जिससे आयातित सोने और चांदी की कीमतें घरेलू बाजार में और अधिक बढ़ गई हैं। भारत अपनी सोने की जरूरतों का 90% से अधिक आयात करता है।
जनवरी 2026: बुलियन का महीना
जनवरी 2026 बुलियन निवेशकों के लिए अब तक का सबसे लाभदायक महीना साबित हो रहा है। सोने की कीमत में इस महीने 12% की वृद्धि हुई है, जबकि चांदी ने 18% से अधिक की छलांग लगाई है। यह तेजी वैश्विक अनिश्चितता, मुद्रा में उतार-चढ़ाव और भारत में त्योहारी मौसम के बाद मजबूत मांग के संयोजन का परिणाम है।
बाजार विशेषज्ञों की राय
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा परिस्थितियों में सोने और चांदी की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी रह सकती हैं। हालांकि, रिकॉर्ड ऊंचाई के बाद कुछ समेकन या तकनीकी सुधार की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
कोटक सिक्योरिटीज के कमोडिटी विश्लेषक ने कहा, “भू-राजनीतिक तनाव, डॉलर की कमजोरी और केंद्रीय बैंकों की खरीदारी के कारण सोने में तेजी का रुख जारी रह सकता है। हालांकि, इतने ऊंचे स्तर पर मुनाफावसूली की संभावना हमेशा बनी रहती है।”
चांदी के बारे में विशेषज्ञों का कहना है कि यह सोने से भी अधिक अस्थिर धातु है, लेकिन इसकी औद्योगिक मांग इसे मजबूती प्रदान कर रही है। ग्रीन एनर्जी की ओर वैश्विक बदलाव चांदी के लिए दीर्घकालिक सकारात्मक संकेत है।
ज्वैलर्स और खुदरा बाजार पर प्रभाव
सोने की बढ़ती कीमतों ने ज्वैलर्स को चिंता में डाल दिया है। ऑल इंडिया जेम एंड ज्वैलरी डोमेस्टिक काउंसिल के एक प्रवक्ता ने कहा, “इतने ऊंचे दामों पर खुदरा मांग प्रभावित हो रही है। लोग छोटी खरीदारी कर रहे हैं या खरीदारी को टाल रहे हैं।”
हालांकि, निवेश की दृष्टि से सोने की मांग मजबूत बनी हुई है। सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड और गोल्ड ETF में निवेश में वृद्धि देखी गई है, क्योंकि निवेशक फिजिकल गोल्ड के विकल्प तलाश रहे हैं।
निवेशकों के लिए सुझाव
वित्तीय सलाहकारों का कहना है कि मौजूदा ऊंचे स्तर पर निवेशकों को सावधानी बरतनी चाहिए:
1. चरणबद्ध निवेश करें: एक साथ बड़ी रकम लगाने के बजाय, सिस्टमैटिक तरीके से निवेश करें।
2. पोर्टफोलियो में संतुलन रखें: अपनी कुल संपत्ति का केवल 10-15% ही सोने-चांदी में रखें।
3. निवेश का माध्यम चुनें: फिजिकल गोल्ड के अलावा, गोल्ड ETF, सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड जैसे विकल्प भी देखें।
4. लंबी अवधि का नजरिया रखें: सोना-चांदी दीर्घकालिक निवेश के लिए बेहतर है, न कि अल्पकालिक ट्रेडिंग के लिए।
5. बाजार पर नजर रखें: वैश्विक घटनाक्रम, डॉलर की चाल और केंद्रीय बैंकों की नीतियों पर नजर रखें।
आगे का दृष्टिकोण
तकनीकी विश्लेषकों का मानना है कि अगर सोना MCX पर 1.67 लाख के स्तर को बनाए रखता है, तो यह 1.70 लाख और उसके बाद 1.75 लाख की ओर बढ़ सकता है। नीचे की ओर, 1.62 लाख एक मजबूत सपोर्ट लेवल है।
चांदी के लिए, 3.80 लाख एक महत्वपूर्ण प्रतिरोध स्तर है। इसे पार करने पर यह 4 लाख रुपये प्रति किलो की ओर बढ़ सकती है, जबकि 3.60 लाख एक मजबूत सपोर्ट है।
निष्कर्ष
सोने और चांदी की कीमतों में यह उछाल वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता और भू-राजनीतिक तनाव का प्रतिबिंब है। जबकि यह मौजूदा निवेशकों के लिए खुशखबरी है, नए निवेशकों को सावधानी से आगे बढ़ना चाहिए।
भारत में, जहां सोना सांस्कृतिक और वित्तीय दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण है, ये कीमतें घरेलू बजट और शादी-विवाह के खर्चों को प्रभावित कर रही हैं। आने वाले हफ्तों में, फेडरल रिजर्व की बैठक, भू-राजनीतिक घटनाक्रम और डॉलर की चाल बुलियन की कीमतों की दिशा तय करेंगे।
निवेशकों को सलाह दी जाती है कि वे अपने वित्तीय सलाहकारों से परामर्श करें और अपनी जोखिम क्षमता के अनुसार निवेश निर्णय लें। सोना-चांदी हमेशा पोर्टफोलियो डाइवर्सिफिकेशन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रहे हैं, लेकिन समय और मात्रा का चुनाव सफलता की कुंजी है।
डिस्क्लेमर: यह समाचार रिपोर्ट केवल सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है। निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श अवश्य करें। बाजार में जोखिम है और पिछला प्रदर्शन भविष्य के रिटर्न की गारंटी नहीं है।






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