भोर की आवाज़, पटना, 5 मार्च 2026 : बिहार की सियासत इन दिनों एक ऐतिहासिक बदलाव की दहलीज पर खड़ी है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, जो पिछले दो दशकों से राज्य की सत्ता का चेहरा रहे हैं, अब राज्यसभा की ओर बढ़ रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक उनके नामांकन पत्र तैयार हैं — सिर्फ हस्ताक्षर बाकी हैं।
नीतीश का ‘दिल्ली प्लान’

जेडीयू सूत्रों के मुताबिक नीतीश कुमार ने राज्यसभा सीट के लिए नामांकन की तैयारी कर ली है। खबर यह भी है कि नीतीश कुमार 16 मार्च के बाद मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे सकते हैं और 16 मार्च को राज्यसभा चुनाव होने तक वे बिहार के मुख्यमंत्री बने रहेंगे।
चर्चा यह भी है कि पहले निशांत को राज्यसभा भेजने की योजना थी, लेकिन तकनीकी कागजात तैयार न होने के कारण रणनीति बदली गई और अब मुख्यमंत्री खुद दिल्ली जा सकते हैं।
नए मुख्यमंत्री की रेस में कौन-कौन?
2025 के बिहार विधानसभा चुनावों में 89 सीटों के साथ बीजेपी ने अपना दबदबा कायम किया, जबकि जेडीयू ने 85 सीटें जीतकर दूसरे नंबर पर रही। ऐसे में साफ है कि नीतीश कुमार के बाद राज्य की कमान बीजेपी के पास जा सकती है।
बीजेपी के विकल्पों में सम्राट चौधरी और विजय सिन्हा जैसे कद्दावर नाम सामने आ रहे हैं। सम्राट चौधरी, जो वर्तमान डिप्टी सीएम हैं और मजबूत संगठन के लिए जाने जाते हैं, सबसे प्रबल दावेदार माने जा रहे हैं। इसके अलावा नित्यानंद राय (केंद्रीय राज्यमंत्री) का नाम भी चर्चा में है।
अगर यह बदलाव होता है, तो अप्रैल में पुराने सदस्यों का कार्यकाल खत्म होने के बाद बिहार में पहली बार बीजेपी का अपना मुख्यमंत्री बनने का रास्ता साफ हो सकता है।
निशांत कुमार — डिप्टी सीएम की रेस में
सूत्रों की मानें तो नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार को भी अहम जिम्मेदारी मिलने वाली है। उन्हें बिहार का डिप्टी सीएम बनाया जा सकता है, हालांकि इस पर अभी कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।
गठबंधन के नए समीकरण
अगर मुख्यमंत्री भाजपा का हुआ, तो मंत्रिमंडल के समीकरण उलट सकते हैं। चर्चा है कि ऐसी स्थिति में जेडीयू के मंत्रियों की संख्या भाजपा से ज्यादा हो सकती है और डिप्टी सीएम के दोनों पद जेडीयू को मिल सकते हैं।
इस बदलाव का असर सिर्फ मुख्यमंत्री पद तक सीमित नहीं रहेगा — निगमों, बोर्डों और ब्यूरोक्रेसी तक नई तस्वीर दिख सकती है। सहयोगी दलों लोजपा, हम और अन्य की भूमिका भी नए सिरे से तय होगी।
बिहार की सियासत में यह सबसे बड़ा बदलाव हो सकता है — एक ऐसा मोड़ जहाँ नीतीश कुमार का लंबा अध्याय बंद होगा और बीजेपी पहली बार अपने दम पर मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठेगी। सभी की निगाहें अब 16 मार्च के राज्यसभा चुनाव और उसके बाद होने वाले शपथ ग्रहण समारोह पर टिकी हैं।





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