करोड़ों भक्तों का सैलाब, 12 ज्योतिर्लिंगों से लेकर स्थानीय मंदिरों तक गूंजे ‘हर हर महादेव‘ के नारे
भोर की आवाज़, नई दिल्ली, 15 फरवरी 2026
फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी के पावन अवसर पर पूरे भारतवर्ष में महाशिवरात्रि का पर्व अभूतपूर्व हर्षोल्लास और श्रद्धा के साथ मनाया जा रहा है। प्रातःकालीन प्रहरी मुहूर्त से ही देश के 12 ज्योतिर्लिंगों सहित हजारों शिवालयों में भक्तों का अपार जनसैलाब उमड़ पड़ा है। काशी विश्वनाथ धाम से लेकर उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर तक, हर ओर ‘हर हर महादेव’ और ‘बम बम भोले’ के पावन उद्घोष वातावरण को दिव्य बना रहे हैं।
सुबह 3 बजे से ही जलाभिषेक, रुद्राभिषेक, महामृत्युंजय जाप, भस्म आरती और रात्रि जागरण की परंपराओं का निर्वहन शुरू हो गया। लाखों श्रद्धालु पूरे दिन उपवास रखते हुए भगवान शिव की आराधना में लीन हैं। इस वर्ष की महाशिवरात्रि में भक्तों का उत्साह देखते ही बनता है, जो न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि सामाजिक एकता और सांस्कृतिक समरसता का भी संदेश दे रहा है।
पौराणिक कथाएं और धार्मिक महत्व
महाशिवरात्रि का विशेष महत्व शिव पुराण और लिंग पुराण में वर्णित अनेक पौराणिक कथाओं से जुड़ा है। एक प्रमुख कथा के अनुसार, इसी दिन भगवान शिव ने माता पार्वती से विवाह किया था, जिसे ‘शिव-पार्वती विवाह’ के रूप में मनाया जाता है। यह पर्व दांपत्य जीवन में सुख-समृद्धि और आध्यात्मिक एकता का प्रतीक माना जाता है।
समुद्र मंथन के दौरान निकले हलाहल विष को भगवान शिव ने पीकर संपूर्ण जगत का उद्धार किया था। इसी कारण उन्हें ‘नीलकंठ’ कहा जाता है और इस दिन को ‘नीलकंठ शिवरात्रि’ के रूप में भी जाना जाता है। शिवगणों के अनुसार, यह वह पावन रात्रि है जब भगवान शिव ने तांडव नृत्य कर सृष्टि का संतुलन बनाए रखा और ब्रह्मांड की रक्षा की।
ज्योतिष शास्त्र में इस रात्रि को चार प्रहरों में विभाजित किया गया है। पहला प्रहर शिव पूजन, दूसरा आरती, तीसरा ध्यान और चौथा जागरण के लिए निर्धारित है। प्रत्येक प्रहर में शिवलिंग का विशेष अभिषेक किया जाता है। मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने और रात्रि जागरण करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है तथा समस्त पापों का नाश होता है।
आयुर्वेद में इस समय को शरीर की विषहरण प्रक्रिया (डिटॉक्सिफिकेशन) का सर्वोत्तम काल बताया गया है। उपवास के दौरान फलाहार, दूध, फल और बेलपत्र का सेवन शरीर और मन दोनों को शुद्ध करता है।
प्रमुख शिव धामों में उमड़ा भक्तों का सैलाब
काशी विश्वनाथ मंदिर, वाराणसी
गंगा तट पर स्थित इस प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग में सुबह 3 बजे से ही दर्शन शुरू हो गए। लाखों भक्तों ने कांवड़ों में गंगा जल भरकर बाबा विश्वनाथ का अभिषेक किया। मंदिर समिति ने भक्तों की सुविधा के लिए 5 किलोमीटर लंबी कतार व्यवस्था की है। काशी विश्वनाथ कॉरिडोर में विशेष सजावट की गई है और पूरा परिसर फूलों और दीपों से सुसज्जित है।
विशेष रुद्राभिषेक के लिए 108 ब्राह्मणों द्वारा सामूहिक वैदिक मंत्रोच्चारण किया जा रहा है। वाराणसी के घाटों पर विशेष रौनक देखने को मिल रही है। श्रद्धालु पवित्र स्नान के बाद भोलेनाथ के दर्शन कर रहे हैं और शाम को विशेष गंगा आरती का भव्य आयोजन होगा।
महाकालेश्वर मंदिर, उज्जैन
मध्य प्रदेश के उज्जैन में स्थित महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर में भस्म आरती के लिए भक्त रातभर जागरण कर रहे हैं। यह भस्म आरती देश में अपनी तरह की एकमात्र आरती मानी जाती है। मंदिर में सोने-चांदी के शिवलिंग की विशेष शोभायात्रा निकाली गई, जिसमें हजारों भक्तों ने भाग लिया।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्वयं मंदिर पहुंचकर भक्तों को दर्शन कराए और व्यवस्थाओं का जायजा लिया। मंदिर प्रशासन ने भक्तों की भारी भीड़ को देखते हुए विशेष इंतजाम किए हैं। पूरे दिन निर्बाध दर्शन की सुविधा उपलब्ध है।
सोमनाथ मंदिर, गुजरात
समुद्र तट पर स्थित द्वादश ज्योतिर्लिंगों में से पहले सोमनाथ मंदिर में भी श्रद्धालुओं की अपार भीड़ उमड़ी है। समुद्र किनारे रेत से शिवलिंगों का निर्माण किया जा रहा है और भक्तगण समुद्र के जल से अभिषेक कर रहे हैं। स्थानीय प्रशासन ने 50 हजार से अधिक श्रद्धालुओं के लिए विशेष व्यवस्था की है। मंदिर को दीपों से सजाया गया है और रात्रि में विशेष आरती का आयोजन होगा।
केदारनाथ धाम, उत्तराखंड
बर्फीले हिमालय की गोद में बसे केदारनाथ धाम में हेलीकॉप्टर से पहुंचे भक्तों ने रुद्र जाप किया। सर्दियों के मौसम में मंदिर के कपाट बंद रहने के कारण ऊखीमठ में स्थित केदारनाथ के शीतकालीन आसन पर विशेष अभिषेक और पूजन का आयोजन किया गया। चार धाम यात्रा सीजन से पहले यह पर्व विशेष आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।
अन्य प्रमुख तीर्थ स्थल
हरिद्वार के हर की पौड़ी पर गंगा स्नान का विशेष महत्व है। हजारों श्रद्धालु पवित्र गंगा में डुबकी लगाकर भगवान शिव की आराधना कर रहे हैं। ऋषिकेश में गीता पाठ और विशेष भजन संध्या का आयोजन किया गया है।
तमिलनाडु के रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग में समुद्र जल से अभिषेक की परंपरा निभाई जा रही है। ओडिशा के भुवनेश्वर स्थित लिंगराज मंदिर में नृत्य-नाटक के कार्यक्रम आयोजित हैं। बैद्यनाथ धाम, देवघर में जप-तप और विशेष यज्ञ का आयोजन हुआ।
महाराष्ट्र के त्र्यंबकेश्वर, नासिक में विशेष रुद्राभिषेक किया गया। पश्चिम बंगाल के तारापीठ में तांत्रिक साधनाएं और विशेष पूजा का आयोजन हो रहा है। उत्तर प्रदेश के अलीगढ़, आगरा, लखनऊ, प्रयागराज और मेरठ में स्थानीय शिव मंदिरों में मेले लगे हुए हैं और भक्तों का तांता लगा है।
महानगरों में भी दिखी आस्था की लहर
राजधानी दिल्ली के विभिन्न शिव मंदिरों में सुबह से ही भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी है। छतरपुर स्थित कात्यायनी शक्तिपीठ मंदिर, बिरला मंदिर, गौरी शंकर मंदिर और यमुना के किनारे स्थित अन्य शिव मंदिरों में दर्शन के लिए लंबी कतारें लगी हुई हैं। दिल्ली मेट्रो ने श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विशेष सेवाएं चालू रखी हैं।
मुंबई के प्रसिद्ध बाबूलनाथ मंदिर, वॉकेश्वर मंदिर और अन्य शिव मंदिरों में भी भक्तों का सैलाब उमड़ा है। फिल्म जगत की कई हस्तियों ने भी मंदिरों में पहुंचकर दर्शन किए। कोलकाता के दक्षिणेश्वर काली मंदिर और तारकेश्वर मंदिर में रात्रि जागरण की तैयारियां पूरी हैं।
चेन्नई, हैदराबाद, बेंगलुरु, पुणे और अहमदाबाद जैसे महानगरों में भी शिव मंदिरों में भक्तों का जमावड़ा लगा है। सभी जगह विशेष सुरक्षा व्यवस्था की गई है और भक्तों की सुविधा के लिए पानी, भोजन और चिकित्सा सुविधाओं की उचित व्यवस्था की गई है।
परंपराएं और पूजा विधि
महाशिवरात्रि के दिन भक्तगण शिवलिंग पर जल, दूध, दही, घी, शहद (पंचामृत), बेलपत्र, धतूरा, भांग, जनेऊ, चंदन, फूल और बिल्व पत्र चढ़ाते हैं। बेलपत्र को भगवान शिव को अत्यंत प्रिय माना जाता है। प्रत्येक प्रहर में शिवलिंग का विशेष अभिषेक किया जाता है।
महिलाएं सोलह श्रृंगार कर माता पार्वती का रूप धारण करती हैं और अपने पति की लंबी आयु की कामना करती हैं। कई स्थानों पर शिव बारात की शोभायात्रा निकाली जाती है, जिसमें भक्त नंदी पर सवार भगवान शिव का रूप धारण करते हैं।
मंदिरों में साधु-संतों के शिविर लगे हैं जहां धार्मिक प्रवचन और शिव महिमा का वर्णन किया जा रहा है। योग केंद्रों में विशेष शिव ध्यान सत्र और कैंप का आयोजन किया गया है। भक्तगण ‘ॐ नमः शिवाय’ का जाप करते हुए पूरी रात जागरण करते हैं।
इस वर्ष पर्यावरण प्रेमियों द्वारा ‘प्लास्टिक फ्री शिवरात्रि’ अभियान चलाया जा रहा है। भक्तों से अनुरोध किया गया है कि वे प्लास्टिक के बजाय मिट्टी के दीये, कपड़े की थैलियां और जैविक सामग्री का उपयोग करें। यह पहल पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ धार्मिक परंपराओं को जोड़ने का एक सराहनीय प्रयास है।
सरकारी व्यवस्थाएं और सुरक्षा इंतजाम
केंद्र और राज्य सरकारों ने महाशिवरात्रि पर्व के लिए व्यापक सुरक्षा और व्यवस्था के इंतजाम किए हैं। उत्तर प्रदेश सरकार ने योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर 2 लाख से अधिक पुलिसकर्मी प्रमुख मंदिरों और घाटों पर तैनात किए हैं।
सुरक्षा के लिए ड्रोन सर्विलांस, सीसीटीवी कैमरों की निगरानी, पार्किंग की विशेष व्यवस्था और ट्रैफिक डायवर्जन की योजना बनाई गई है। स्वास्थ्य विभाग ने मंदिरों के आसपास मेडिकल कैंप लगाए हैं जहां आपातकालीन चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध हैं।
भारतीय रेलवे ने तीर्थयात्रियों की सुविधा के लिए 200 से अधिक स्पेशल ट्रेनें चलाई हैं। प्रमुख स्टेशनों पर विशेष हेल्प डेस्क स्थापित किए गए हैं। अलीगढ़ सहित उत्तर प्रदेश के कई शहरों में स्थानीय प्रशासन ने मंदिरों के आसपास बैरिकेडिंग की है और भीड़ प्रबंधन के लिए विशेष टीमें तैनात की हैं।
मौसम विभाग ने उत्तर भारत में ठंडी हवाओं और कुछ क्षेत्रों में हल्की बारिश की चेतावनी दी है, लेकिन भक्तों का उत्साह इससे प्रभावित नहीं हुआ है। प्रशासन ने भक्तों की सुविधा के लिए गर्म कपड़ों और कंबलों की व्यवस्था भी की है।
सामाजिक और सांस्कृतिक प्रभाव
महाशिवरात्रि का पर्व हिंदू, सिख, जैन और बौद्ध समुदायों में समान रूप से श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। यह पर्व सामाजिक सद्भाव और धार्मिक समरसता का प्रतीक बन गया है। विभिन्न समुदायों के लोग एक साथ मिलकर भगवान शिव की आराधना कर रहे हैं।
बॉलीवुड और दक्षिण भारतीय फिल्म जगत के कई सितारे सोशल मीडिया पर अपनी शिव पूजन की तस्वीरें साझा कर रहे हैं और भक्तों को शुभकामनाएं दे रहे हैं। स्कूलों और कॉलेजों में विशेष सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं जिनमें शिव महिमा और पौराणिक कथाओं का वर्णन किया गया।
आर्थिक दृष्टि से देखें तो मंदिरों में चढ़ावा अरबों रुपये में पहुंच रहा है। पर्यटन उद्योग को भी इस पर्व से बड़ा फायदा हो रहा है। तीर्थ स्थलों के आसपास के होटल और धर्मशालाएं पूरी तरह बुक हो चुकी हैं। स्थानीय व्यापारियों के लिए यह पर्व विशेष महत्व रखता है क्योंकि पूजा सामग्री, फूल, फल और अन्य वस्तुओं की बिक्री में भारी वृद्धि होती है।
कोविड महामारी के बाद यह पहली बड़ी धार्मिक सभा है जिसमें स्वास्थ्य प्रोटोकॉल का पालन करते हुए भव्य आयोजन किया गया है। हालांकि, प्रशासन द्वारा भीड़ प्रबंधन और स्वच्छता के विशेष इंतजाम किए गए हैं।
वैज्ञानिक दृष्टिकोण
आधुनिक वैज्ञानिकों के अनुसार, महाशिवरात्रि की रात्रि में चंद्रमा की स्थिति विशेष होती है। फरवरी की अमावस्या की रात में चंद्रमा की न्यून ऊर्जा के कारण मन स्वाभाविक रूप से शांत और ध्यान के लिए अनुकूल होता है। यही कारण है कि इस रात्रि में ध्यान और साधना का विशेष महत्व है।
उपवास की वैज्ञानिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण भूमिका है। नियमित उपवास से शरीर की विषहरण प्रक्रिया (डिटॉक्सिफिकेशन) होती है और पाचन तंत्र को आराम मिलता है। बेलपत्र में पाए जाने वाले रासायनिक तत्व तनाव कम करने और मानसिक शांति प्रदान करने में सहायक होते हैं।
रात्रि जागरण और ध्यान से मस्तिष्क में सेरोटोनिन और डोपामिन जैसे हार्मोन का स्राव बढ़ता है, जो मानसिक स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है। यह पर्व न केवल धार्मिक बल्कि मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है।
अलीगढ़ में भी उमड़े शिवभक्त
उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले में भी स्थानीय शिव मंदिरों में भक्तों की भारी भीड़ देखी जा रही है। शहर के प्रमुख मंदिरों जैसे कालिका देवी मंदिर, बाबा बांके बिहारी मंदिर और अन्य शिवालयों में सुबह से ही श्रद्धालुओं का तांता लगा हुआ है। स्थानीय प्रशासन ने मंदिरों के आसपास यातायात व्यवस्था और सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए हैं।






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