???? 7 मार्च 2026 | धर्म संवाददाता, भोर की आवाज़
हिंदू धर्म में समय की पवित्रता का विशेष महत्व है। हर शुभ कार्य से पहले मुहूर्त देखा जाता है, ग्रहों की दशा का आकलन किया जाता है। इसी कड़ी में वर्ष में दो बार एक ऐसी अवधि आती है जब सभी मांगलिक कार्यों पर पूरी तरह विराम लग जाता है — इसे खरमास कहते हैं। अब एक बार फिर यह अशुभ काल दस्तक देने वाला है। पंचांग के अनुसार, सूर्य देव 15 मार्च 2026 को दोपहर 1 बजकर 8 मिनट पर मीन राशि में प्रवेश करेंगे और उसी समय से खरमास का प्रारंभ हो जाएगा। यह खरमास एक माह तक रहेगा और 14 अप्रैल 2026 को सूर्य के मेष राशि में प्रवेश करते ही इसका समापन होगा।
???? खरमास क्या है? — परिभाषा और अर्थ
हिंदू पंचांग में खरमास वह विशेष समय होता है जब सूर्य देव धनु या मीन राशि में प्रवेश करते हैं। इस दौरान सूर्य का प्रभाव कम हो जाता है और इसलिए विवाह, गृह प्रवेश या अन्य मांगलिक कार्य वर्जित माने जाते हैं।
‘खर’ का अर्थ होता है गधा। जब सूर्य देव के रथ में घोड़ों की जगह गधे जुत जाते हैं, तो उस काल को खरमास कहा जाता है। खरमास को धनुर्मास या मलमास के नाम से भी जाना जाता है। यह नाम ही इस काल के स्वभाव को परिभाषित कर देते हैं — मलिन, मंद और संयम का समय।
???? वैज्ञानिक और ज्योतिषीय कारण
विज्ञान के अनुसार खरमास एक सौर घटना है। जब सूर्य धनु और मीन राशि में प्रवेश करते हैं, तो इन्हें क्रमशः धनु संक्रांति और मीन संक्रांति कहा जाता है। सूर्य जब इन दोनों राशियों में रहते हैं, तो इस अवधि को मलमास या खरमास कहा जाता है।
ज्योतिषीय दृष्टि से देखें तो धनु और मीन राशि के स्वामी देवगुरु बृहस्पति हैं। जब सूर्य इन राशियों में आते हैं, तो वे गुरु के प्रभाव को कम कर देते हैं। किसी भी शुभ कार्य, विशेषकर विवाह के लिए सूर्य और गुरु दोनों का बलवान होना अनिवार्य है। गुरु के कमजोर होने से इस अवधि में किए गए कार्यों के शुभ फल प्राप्त नहीं होते।
???? पौराणिक कथा — गधों पर सवार सूर्य देव
खरमास के पीछे एक अत्यंत रोचक पौराणिक कथा है। मार्कण्डेय पुराण में इससे जुड़ी एक प्राचीन कथा का उल्लेख है। इस कथा के अनुसार सूर्य देव के रथ को सात घोड़े चलाते हैं, जिनके नाम हैं — गायत्री, बृहती, उष्णिः, जगती, त्रिष्टुभ, अनुष्टुभ और पंक्ति। ये इंद्रधनुष के सात रंगों, सप्ताह के सात दिनों और सूर्य की सात किरणों के प्रतीक माने जाते हैं।
जब घोड़े थक जाते हैं, तो सूर्य देव ने उन्हें विश्राम के लिए मुक्त किया और गधों को रथ से बाँध लिया। अब रथ फिर से चल पड़ा, लेकिन गधे घोड़ों जितने तेज नहीं थे। उनकी गति धीमी थी, जिससे रथ की रफ्तार कम हो गई। परिणामस्वरूप, सूर्य देव की चमक और तेज भी मंद पड़ गया। यही वह अवधि है जिसे खरमास कहा जाता है।
???? साल में दो बार आता है खरमास
खरमास साल में दो बार आता है। एक बार 15 दिसंबर से 14 जनवरी तक रहता है, जब सूर्य धनु राशि में प्रवेश करता है। दूसरी बार 15 मार्च से 13 अप्रैल तक रहता है, जब सूर्य के मीन राशि में प्रवेश करता है। ऐसे में साल में दो महीने ऐसे आते हैं, जब शुभ कार्यों पर पूरी तरह से रोक लगी रहती है।
???? खरमास में क्या न करें
खरमास की अवधि सामाजिक और धार्मिक जीवन पर गहरा प्रभाव डालती है। खरमास एक माह की अशुभ अवधि मानी जाती है, इसलिए इस दौरान शादी-विवाह, सगाई, गृह प्रवेश, नामकरण और मुंडन संस्कार जैसे शुभ और मांगलिक काम करने की मनाही होती है।
खरमास में नई गाड़ी खरीदना भी उचित नहीं माना जाता। इसी तरह संपत्ति से जुड़े काम जैसे जमीन या मकान खरीदना, नया व्यापार शुरू करना या कोई बड़ा निवेश करना भी टालने की सलाह दी जाती है।
विशेष रूप से विवाह इस अवधि में नहीं किया जाता। मान्यता है कि इस समय शादी करने से दांपत्य जीवन में बाधाएं आ सकती हैं। इसके अलावा सगाई, नई दुल्हन का गृह प्रवेश, घर की नई शुरुआत या कोई बड़ी धार्मिक पूजा भी इस दौरान टाल दी जाती है।
✅ खरमास में क्या करें — साधना और दान का काल
यह समय जहाँ सांसारिक कार्यों के लिए वर्जित है, वहीं आध्यात्मिक उन्नति के लिए यह सर्वोत्तम काल माना गया है।
खरमास के दौरान ब्राह्मणों, गरीबों और जरूरतमंदों को अन्न-धन समेत अन्य चीजों का दान करना चाहिए। इससे जातक को शुभ फल की प्राप्ति होती है और हमेशा अन्न-धन के भंडार भरे रहते हैं। रोजाना सूर्य देव को अर्घ्य दें और जीवन में सुख-शांति की प्राप्ति के लिए कामना करें। सुबह स्नान करने के बाद विष्णु जी की पूजा करें और भोग में तुलसी के पत्ते जरूर शामिल करें।
खरमास के दौरान पवित्र नदी में स्नान करने का विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस उपाय को करने से साधक को सभी पापों से मुक्ति मिलती है और भगवान सूर्य देव की कृपा प्राप्त होती है। इस दौरान नदी में दीपदान जरूर करना चाहिए।
पूजा-पाठ, व्रत, कथा और दान का इस काल में अत्यधिक महत्व माना गया है। हिन्दू धर्म में यह महीना आध्यात्मिक उन्नति का सर्वोत्तम समय माना जाता है।
???? खरमास से पहले मार्च में विवाह मुहूर्त
जो परिवार विवाह की तैयारी में लगे हैं, उनके लिए 15 मार्च से पहले के मुहूर्त बेहद महत्वपूर्ण हैं। मार्च 2026 में विवाह के शुभ मुहूर्त इस प्रकार हैं — 2 मार्च (सोमवार), 3 मार्च (मंगलवार), 4 मार्च (बुधवार), 7 मार्च (शनिवार), 8 मार्च (रविवार), 9 मार्च (सोमवार), 11 मार्च (बुधवार), 12 मार्च (गुरुवार)। इसके बाद 15 मार्च से खरमास लगते ही विवाह के सभी मुहूर्त बंद हो जाएंगे।
???? खरमास और अधिकमास में अंतर
कई लोग खरमास और अधिकमास को एक ही समझते हैं, परंतु ये दोनों अलग हैं। खरमास और अधिकमास, दोनों ही हिंदू पंचांग से जुड़े विशेष समय होते हैं, लेकिन इनका कारण और प्रकृति बिल्कुल अलग है। खरमास वह समय है जब सूर्य ग्रह बृहस्पति की राशि धनु या मीन में प्रवेश करते हैं, जबकि अधिकमास एक अतिरिक्त चंद्र माह होता है।
???? खरमास 2026 — एक नजर में
| विवरण | तिथि |
|---|---|
| खरमास प्रारंभ | 15 मार्च 2026 |
| खरमास समापन | 14 अप्रैल 2026 |
| कारण | सूर्य का मीन राशि में प्रवेश |
| अवधि | लगभग 30 दिन |
| वर्जित कार्य | विवाह, सगाई, गृह प्रवेश, नामकरण, मुंडन, नया व्यापार |
| शुभ कार्य | दान, पूजा-पाठ, व्रत, सूर्य अर्घ्य, नदी स्नान |
???? खरमास केवल एक प्रतिबंध का काल नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि और ईश्वर भक्ति का अमूल्य अवसर है। इस माह को साधना, दान और ध्यान में लगाएं — माँ लक्ष्मी और भगवान सूर्यनारायण की कृपा अवश्य प्राप्त होगी |





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