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सहकारी समितियों का डिजिटल सशक्तिकरण: 73,000 से अधिक PACS के कम्प्यूटरीकरण से कृषि ऋण में आएगी पारदर्शिता

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भोर की आवाज़, नई दिल्ली – भारत सरकार द्वारा प्राथमिक कृषि ऋण सहकारी समितियों (PACS) को आधुनिक बनाने के लिए चलाई जा रही महत्वाकांक्षी परियोजना तेजी से आगे बढ़ रही है। प्रारंभ में ₹2,516 करोड़ के बजट के साथ शुरू की गई इस योजना को अब बढ़ाकर ₹2,925.39 करोड़ कर दिया गया है। यह परियोजना देश भर में लगभग 80,000 कार्यशील PACS को एक समान डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाने का लक्ष्य रखती है।

परियोजना की प्रगति

नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, अब तक 31 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से कुल 73,492 PACS को इस परियोजना के तहत स्वीकृति मिल चुकी है। इनमें से 59,920 PACS को पहले ही ERP (एंटरप्राइज रिसोर्स प्लानिंग) सॉफ्टवेयर पर ऑनबोर्ड किया जा चुका है, और 30 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों ने आवश्यक हार्डवेयर की खरीद पूरी कर ली है।

परियोजना के प्रमुख उद्देश्य

तकनीकी सशक्तिकरण: सभी कार्यशील PACS को एक समान ERP आधारित राष्ट्रीय सॉफ्टवेयर पर लाया जा रहा है, जो उन्हें NABARD के माध्यम से राज्य सहकारी बैंकों (StCBs) और जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों (DCCBs) से जोड़ेगा। यह सॉफ्टवेयर क्लाउड-आधारित है और साइबर सुरक्षा तथा डेटा भंडारण की सुविधा के साथ आता है।

पारदर्शिता और दक्षता: इस पहल से PACS की परिचालन दक्षता में सुधार होगा, ऋण का त्वरित वितरण सुनिश्चित होगा, लेनदेन की लागत कम होगी, और किसानों के बीच PACS के संचालन में विश्वसनीयता बढ़ेगी। यह पारदर्शी लेखा प्रणाली और तत्काल ऑडिट को संभव बनाएगा।

परियोजना की संरचना

अवधि और बजट: यह केंद्र प्रायोजित परियोजना 2022-23 से 2026-27 तक पांच वर्षों की अवधि के लिए स्वीकृत की गई है। कुल बजट में से केंद्र सरकार का हिस्सा ₹1,528 करोड़, राज्य सरकारों का ₹736 करोड़, और NABARD का ₹252 करोड़ है।

प्रदान की जाने वाली सुविधाएं: प्रत्येक PACS को कंप्यूटर, वेबकैम, VPN, प्रिंटर और बायोमेट्रिक डिवाइस प्रदान किया जा रहा है। साथ ही, PACS द्वारा संचालित उर्वरक दुकानों, बीज प्रसंस्करण इकाइयों आदि में कैशलेस/डिजिटल लेनदेन की सुविधा के लिए आधार पे डिवाइस भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

प्रशिक्षण और सहायता: परियोजना के तहत 26,882 PACS अधिकारियों/कर्मचारियों को ERP पर प्रशिक्षण दिया जा चुका है। राष्ट्रीय सहकारी प्रशिक्षण परिषद (NCCT) संस्थानों और अन्य सहकारी प्रशिक्षण संस्थानों के माध्यम से व्यापक प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं।

PACS का महत्व

PACS भारत की त्रिस्तरीय अल्पकालिक सहकारी ऋण संरचना का सबसे निचला और महत्वपूर्ण स्तर हैं। देश भर में लगभग 13 करोड़ किसान PACS के सदस्य हैं, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था के विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। PACS कुल कृषि ऋण का 41% (3.01 करोड़ खाते) प्रदान करती हैं।

आत्मनिर्भर भारत की दिशा में कदम

यह परियोजना ‘आत्मनिर्भर भारत अभियान’ के अनुरूप PACS को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। पहले PACS मुख्य रूप से मैनुअल तरीके से काम करती थीं, जिससे अक्षमता और विश्वास की कमी थी। अब डिजिटलीकरण से यह संस्थाएं आधुनिक बैंकिंग सुविधाएं प्रदान कर सकेंगी।

बहुआयामी सेवा केंद्र के रूप में विस्तार

कम्प्यूटरीकृत PACS को विभिन्न सरकारी योजनाओं के कार्यान्वयन के लिए नोडल सेवा वितरण बिंदु के रूप में भी विकसित किया जा रहा है। अब तक:

  • 36,592 PACS को प्रधानमंत्री किसान समृद्धि केंद्र (PMKSK) में अपग्रेड किया गया है
  • 762 PACS को प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि केंद्र (PMBJK) के रूप में कार्य करने के लिए स्टोर कोड मिल चुके हैं
  • PACS को पेट्रोल/डीजल रिटेल आउटलेट खोलने की भी अनुमति दी गई है

संवैधानिक और प्रशासनिक ढांचा

PACS को संबंधित राज्यों के सहकारी समिति अधिनियम के तहत पंजीकृत किया जाता है और राज्य के सहकारी समिति रजिस्ट्रार द्वारा प्रशासित किया जाता है। हालांकि DCCBs और StCBs RBI द्वारा विनियमित हैं, PACS बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 के दायरे से बाहर हैं।

भविष्य की योजनाएं

सरकार ने सहकारी आंदोलन को मजबूत करने और इसे जमीनी स्तर तक पहुंचाने के लिए 2 लाख नई बहुउद्देशीय PACS, डेयरी और मत्स्य पालन सहकारी समितियां स्थापित करने की योजना भी स्वीकृत की है, जो पांच वर्षों में देश के सभी पंचायतों/गांवों को कवर करेगी।

परियोजना की समय सीमा 31 मार्च 2027 है, जब तक सभी PACS का कम्प्यूटरीकरण और हैंडहोल्डिंग सपोर्ट पूरा होने की उम्मीद है। यह पहल छोटे और सीमांत किसानों को संस्थागत ऋण की आसान पहुंच सुनिश्चित करके भारतीय कृषि क्षेत्र में एक नए युग की शुरुआत करेगी।

bhorkiawazz
Author: bhorkiawazz

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