– योग ना तो धार्मिक अनुष्ठान और ना ही बीमारी का इलाज बल्कि ये है हमारी भारतीय सभ्यता और संस्कृति की पहचान ।
– योग का अभ्यास हमें अपनी जड़ों से जोड़ता है ।
एएमयू जिम्नेजियम क्लब द्वारा अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर आयोजित “योग के महत्त्व” पर आयोजित संगोष्ठी को सम्बोधित करते हुए एएमयू जिम्नेजियम के वरिष्ठ प्रशिक्षक मजहर उल कमर ने योग साधकों से अपने संबोधन में कहा कि योग भारतीय सभ्यता और संस्कृति का प्रतीक है। यह भारतीय दर्शन और जीवन दृष्टि का अभिन्न अंग है। योग का उद्गम भारत में हुआ और यह वेदों तथा उपनिषदों में उल्लिखित है। योग का पहला उल्लेख ऋग्वेद में मिलता है, और पतंजलि के योगसूत्र में इसे विधिवत संकलित किया गया। योग की प्राचीन परंपरा हमें बताती है कि यह किसी धार्मिक अनुष्ठान का हिस्सा नहीं है बल्कि यह आत्म-साक्षात्कार का माध्यम है। उन्होंने आगे कहा कि ,योग केवल एक शारीरिक व्यायाम नहीं है, न ही यह कोई धार्मिक अनुष्ठान है। यह हमारी भारतीय सभ्यता और संस्कृति की पहचान है। योग का अभ्यास हमें अपनी जड़ों से जोड़ता है और हमें एक संतुलित, शांतिपूर्ण और स्वस्थ जीवन जीने की दिशा के लिए प्रेरित करता है । यह न केवल व्यक्तिगत बल्कि सामाजिक और वैश्विक स्तर पर भी शांति और सद्भावना का संदेश फैलाता है।
योग भारतीय संस्कृति का एक अमूल्य रत्न है, ऋषियों और मुनियों द्वारा बनाए गए योग के सिद्धांत को अपनाते हुए सर्वप्रथम हमें यम और नियम का पालन करना चाहिए । आज दुनिया योग के मूल मंत्र यम और नियम के सिद्धांतों को अपने समाज में लागू कर रही है पर हम लोग इससे दूर होकर सिर्फ कुछ शारीरिक क्रियो तक ही योग को सीमित कर इसके मूल सिद्धांत से दूर होते जा रहे है , जो भारतीय समाज के लिए शुभ नही है । हम सब भारतीयों को मिलकर योग को सहेजना और संजोना चाहिये । इस अवसर पर कुश्ती प्रशिक्षक राकेश चौधरी, तय्यब शेरवानी , शुऐब , मोहम्मद मारूफ , आदि लोग उपस्थित थे ।






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